महाकाल सेवा ट्रस्ट सिर्फ एक एनजीओ नहीं, बल्कि एक ऐसा परिवार है जो समाज के हर जरूरतमंद व्यक्ति तक प्यार, देखभाल, और अवसर पहुँचाना चाहता है। हमारा मकसद है कि हर गरीब बच्चा पढ़े, हर इंसान स्वस्थ रहे, हर महिला सुरक्षित और आत्मनिर्भर बने, हमारा पर्यावरण हरा-भरा रहे, और समाज में कोई भी पीछे न छूटे। इस पेज पर आप जानेंगे कि हम क्या करते हैं, कैसे करते हैं, और आप कैसे इस बदलाव का हिस्सा बन सकते हैं। हमारे काम का आधार है विश्वास, मेहनत, और आपका साथ। आइए, एक साथ मिलकर एक बेहतर भारत बनाएँ!

Mahakal Seva Trust

A Beacon of Hope for Society

  • बच्चों की शिक्षा
  • बेहतर स्वास्थ्य
  • पर्यावरण संरक्षण
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शिक्षा: हर बच्चे का सपना, हमारी जिम्मेदारी

मुफ्त स्कूल और कोचिंग सेंटर Project

देवरिया और आसपास के गाँवों में हमने 10 मुफ्त स्कूल और कोचिंग सेंटर स्थापित किए हैं। यहाँ बच्चे हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, और कंप्यूटर जैसी बुनियादी शिक्षा प्राप्त करते हैं। हमारे स्कूलों में खेल, कला, और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दी जाती है ताकि बच्चे हर तरह से विकसित हों।

शैक्षिक सामग्री का वितरण

हम हर साल हजारों बच्चों को मुफ्त किताबें, कॉपी, पेंसिल, स्कूल बैग, और यूनिफॉर्म बाँटते हैं। इसके अलावा, जरूरतमंद बच्चों को साइकिल भी दी जाती है ताकि वे दूर के स्कूलों तक आसानी से पहुँच सकें।

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स्वास्थ्य: जीवन की नींव

मुफ्त स्वास्थ्य शिविर

हर महीने हम देवरिया के गाँवों और झुग्गी-झोपड़ियों में स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं। इन शिविरों में डॉक्टर, नर्स, और मेडिकल विशेषज्ञ मुफ्त जाँच, दवाइयाँ, और सलाह देते हैं। हम आँखों, दाँतों, और बच्चों की विशेष जाँच के लिए अलग-अलग कैंप भी आयोजित करते हैं।

पोषण और टीकाकरण

हम कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक खाना, प्रोटीन किट, और विटामिन की गोलियाँ बाँटते हैं। हम टीकाकरण अभियानों में सरकार के साथ मिलकर काम करते हैं ताकि हर बच्चे को जरूरी टीके मिलें।

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धरती हमारी माँ, हमारी जिम्मेदारी

पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ

हम हर साल "हरियाली उत्सव" के तहत हजारों पेड़ लगाते हैं। हम नीम, पीपल, और बरगद जैसे स्थानीय पेड़ों को चुनते हैं और उनकी देखभाल के लिए स्थानीय समुदायों को जिम्मेदारी देते हैं।

प्लास्टिक मुक्त अभियान

हम प्लास्टिक बैग के खिलाफ जागरूकता फैलाते हैं और कपड़े के थैले बाँटते हैं। हमारी "प्लास्टिक छोड़ो" मुहिम में स्कूलों और कॉलेजों के बच्चे हिस्सा लेते हैं।